किसान पर दोहे
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छोटे छोटे पौध में , पोषित सुरभित धान।
देख जिन्हें निज खेत में,पाता खुशी किसान।।
हरपल दुख सहता कृषक,अनुपम है यह भेद।
फसल उगाने के लिए , नित्य बहाता स्वेत।।
पावस जब आता सरस,करता है निज काम।
जीवन भर पाता कहाँ,कृषक कभी विश्राम।।
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