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Showing posts from July, 2020

किसान पर दोहे

★★★★★★★★★★★★★★★★ छोटे  छोटे  पौध  में , पोषित सुरभित धान। देख जिन्हें निज खेत में,पाता खुशी किसान।। हरपल दुख सहता कृषक,अनुपम है यह भेद। फसल उगाने के लिए , नित्य बहाता स्वेत।। पावस जब आता सरस,करता है निज काम। जीवन भर पाता कहाँ,कृषक कभी विश्राम।।

सावन पर दोहे

सावन में पड़ने लगी,रिमझिम सरस फुहार। हरित चुनर ओढ़ी धरा,सुरभित है संसार।। कोयल कूके बाग में , दादुर करते शोर। सौंधी माटी की महक,फैल रही चहुँ ओर।। कल कल कर बहने लगी,धरती में जल धार। पावस का वरदान पा,आलोकित संसार।। तरु लता सब  झूमकर  ,  देते है संदेश। प्रेम रहे सब जीव में,छोड़ो कपट कलेश।। पावस में धरती बनी,अब खुशियों का केन्द्र। देखा जब मोहक छटा,झूमे आज डिजेन्द्र।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

सावन में झूलों का उत्सव

गीत - सावन में झूलों का उत्सव ★★★★★★★★★★★★ अंबर का यह रूप निराला, सबके मन को भाया है। सावन में झूलों का उत्सव, खुशियाँ लेकर आया है ।।0।। ★★★★★★★★★ सावन जब-जब बरसे रिमझिम, तन-मन को हर्षाया है । मोर पपीहा प्रेम मगन हो , झूम-झूम लहराया है । महके मिट्टी पुण्य धरा की , सौंधी सोन सुहाया है । सनन-सनन चलकर पुरवाई, मन की प्यास बढ़ाया है । जीवों में आनंद भरे नित , रुत मन को महकाया है । सावन में झूलों का उत्सव, खुशियाँ लेकर आया है।।1।। ★★★★★★★★★ पावस के बूंदों ने अब तो, मन आनंदित कर दी है । प्यासी प्रेमी के अधरों में, प्यास भी अतुलित भर दी है। रंग बिरंगी फूल खिले हैं, भौरा गुनगुन करता हैं । यौवन पर है नव निखार अब, प्रेम हृदय में भरता है । सुखद सुहाना इस मौसम ने, मन मे आग लगाया है। सावन में झूलों का उत्सव, खुशियाँ लेकर आया है।।2।। ★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना, बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822