गीत - सावन में झूलों का उत्सव ★★★★★★★★★★★★ अंबर का यह रूप निराला, सबके मन को भाया है। सावन में झूलों का उत्सव, खुशियाँ लेकर आया है ।।0।। ★★★★★★★★★ सावन जब-जब बरसे रिमझिम, तन-मन को हर्षाया है । मोर पपीहा प्रेम मगन हो , झूम-झूम लहराया है । महके मिट्टी पुण्य धरा की , सौंधी सोन सुहाया है । सनन-सनन चलकर पुरवाई, मन की प्यास बढ़ाया है । जीवों में आनंद भरे नित , रुत मन को महकाया है । सावन में झूलों का उत्सव, खुशियाँ लेकर आया है।।1।। ★★★★★★★★★ पावस के बूंदों ने अब तो, मन आनंदित कर दी है । प्यासी प्रेमी के अधरों में, प्यास भी अतुलित भर दी है। रंग बिरंगी फूल खिले हैं, भौरा गुनगुन करता हैं । यौवन पर है नव निखार अब, प्रेम हृदय में भरता है । सुखद सुहाना इस मौसम ने, मन मे आग लगाया है। सावन में झूलों का उत्सव, खुशियाँ लेकर आया है।।2।। ★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना, बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822